Saturday, July 10, 2010
Saturday, May 22, 2010
जब मैंने घर छोड़ा
आम के पेड़ो में आम लग चूका था ,मै बगीचे में अपने दोस्तों के साथ " कुकुहा " खेल रहा था ,तभी मेरे घर के तरफ एक मोटर साईकिल जाती हुई दिखी मै समझ गया मेरे मंटू चाचा होंगे मै ....दौड़ते हुआ घर पंहुचा . मंटू चाचा मुझे देखते ही मुस्कुराये और मुझ से कहा जल्दी से तैयार हो जाओ चलना है .मै कुछ समझ नही पाया कहा जाना है ? किस लिए जाना है ?
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अभी आ रहा है ........
Tuesday, May 18, 2010
कविता याद करते करते ....
एक दिन पापा ने एक कविता याद करने के लिए कहा और वो स्कूल चले गए (मेरे पापा टीचर है )
मै सारा दिन कविता याद करता रहा सम तक पापा नही आये सायद किसी रिश्तेदार के यहाँ चले गए थे .देर रात जब वो लौटे तो मै सो गया था .खाना खाने के लिए पापा ने मुझे जगाया (क्यों की मै पापा के साथ ही खाना खाता था ) तो ,मै जागते ही कविता सुनाने लगा और कविता सुना के फिर सो गया ...ये देख के पापा ममी हंसने लगे फिर मुझे जगाया और मुझे बताया की तुम्हे कविता सुनाने के लिए नही जगाया बल्कि खाना खाने के लिए जगाया है .उस दिन के बाद पापा मुझे कुछ याद करने के लिए देते तो बड़े प्यार से बोलते ,ज्यादा दबाव नही देते.
बचपन में हम किसी बात से एक बार डर जाये तो उसका असर काफी दिनों तक रहता है इस लिए बछो के साथ प्यार से पेस आना चाहिए ........
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सर्वेश दुबे
Tuesday, May 11, 2010
पहली झलक जो याद है ....
घर में खाना नही बना था ,पापा की दादी गुजर गयी थी उस दिन और मुझे भूख लगी थी .मेरी दीदी ने किसी से खाना मांग कर खिलाया था .जब पापा की दादी का अंतिम संस्कार होने जा रहा था तो मेरे चाचा ने मुझे भी साथ ले लिया था .मुझे अछि तरह याद है जब चाचा तालाब में नहा रहे थे तो मेरा भी मन कर रहा था पानी में खेलने का लेकिन मै किनारे पे ही खड़ा रहा .....
जब चाचा नहा के तालाब से बाहर आये तो मुझे गोद में उठा कर तालाब में ले गए और मुझे भी नहलाया . फिर हम घर आ गए ..........
Monday, May 10, 2010
मेरा जीवन ...
मेरा जीवन..
मेरा जीवन केवल केवल मेरा जीवन ही नही है .उस में कई पहलु ऐसे भी है जिन को आप अपनी जिंदगी में कही ना कही अनुभव करेंगे .मै इस ब्लॉग के माध्यम से लोगो के जीवन के कुछ ऐसे पहलु को लाना चाहता हू जिसका हम सब की जिंदगी कुछ मतलब है .इस प्रयास में आप सभी के मदद की उमीद करता हू .
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